गंगा विचार मंच

Tanno Ganga Prachotayat.

" मेरी गंगा - मेरा जीवन "

गंगा विचार मंच पर आपका स्वागत है

- गंगा नदी की अविरलता एवं निर्मलता के लिए ऑनलाइन साझा संवाद मंच

गंगा विचार मंच

इस मंच का उद्देश्य गंगा नदी के संरक्षण से संबंधित तमाम पहलुओं को लेकर विभिन्न विषयों पर रचनात्मक संवाद स्थापित करना है। यह मंच सामान्य नागरिक, गैर-सरकारी संगठनों, स्वैच्छिक संस्थाओं या निगमों से लेकर समाज के प्रत्येक वर्ग को एक अवसर प्रदान करता है जिससे वह आपसी विचार-विमर्श करके प्रदूषण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए उचित सुझाव दे सकते हैं।

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सुझाव

गंगा विचार मंच एक ऐसा पटल है जो आपको गंगा नदी संरक्षण के लिए विचार व सुझाव देने का एक बेहतरीन मौका प्रदान करता है। इस मंच पर प्रस्तुत किए गए सभी सुझावों और विचारों का विश्लेषण हमारी टीम के विशेषज्ञ करेंगे ताकि उनसे निकले तार्किक निष्कर्षों को नदी संरक्षण के लिए तैयार की जाने वाली सामयिक कार्य योजना में शामिल किया जा सके। जरूरत पड़ने पर हम और सुझावों के लिए आपसे संपर्क करेंगे। हमारा पूरा भरोसा है कि आपके चुनिंदा सुझाव गंगा संरक्षण की भविष्य की नीतियों व निर्णयों में अहम् भूमिका निभाएंगे। अत्यधिक महत्वपूर्ण सुझावों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

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गंगा वालंटियर

सुझाव देने के अलावा आप सबको इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्वयं सेवा का मौका भी दिया जा रहा है। पहले पृष्ठ के संबंधित बटन पर क्लिक करके आप अपना व्यक्तिगत विवरण भर सकते हैं। इसके जरिए हम जरूरत के अनुसार आपसे संपर्क करेंगे। स्वयं सेवकों को उनके निवास के आसपास होने वाली गंगा संरक्षण से जुड़ी तमाम गतिविधियों व संभावनाओं के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा ताकि वे उनमें अपनी भागीदारी निभा सकें। आपकी सूचना को पूरी ईमानदारी के साथ उपयोग में लाया जाएगा।

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गतिविधियाँ

गंगा उत्सव


नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत इलाहाबाद में गंगा विचार मंच के सदस्यों ने गंगा उत्सव का आयोजन किया। स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों से मां गंगा को साफ रखने का आग्रह किया और स्कूली बच्चों को गंगा को साफ रखने की शपथ दिलाई।


घाटों पर सफाई


इलाहाबाद के गंगा तट पर गंगा विचार मंच के सदस्यों द्वारा घाटों पर सफाई अभियान चलाया गया और घाट पर आये श्रद्धालुओं को मां गंगा को साफ रखने के लिए जागरूक किया गया।


नुक्कर नाटक


स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान, अनुपशहर में नुक्कर नाटक का कार्यक्रम|


स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 15 सितंबर- 2 अक्टूबर 2017, ऋषिकेश


स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत ऋषिकेश में लक्षमन झूला से राम झूला तक गंगा के दोनों किनारों पर स्वच्छता अभियान चलाया गया


लोकप्रिय प्रकाशन

Issues In The Catchment Area (Afforestation + Agriculture)

To rejunile Maa Ganga there should be voluntaires who can guard the river 24 Hrs & this can be done when whole Ganga river basin planted with medicinal & fruits Tree. Which can be prevented by voluantaires, They should also be paid by project fund. So that they will be responsible for the cleaness of Ganga & the trees around. Trees & Ganga area lengthwise should be distributed among paid young voluntaires, & technical knowhow can be given by the responsible department. This scheme will clean the Maa Ganga & ofcourse the unemployment among youth also.

People Participation And Contribution

Active participation of students from various schools and colleges of the cities situated on the banks of river ganga is required. Associations like youth hostels association can be taken for creating awareness. Schedule for every school and college should be made at least for one hour any day of the week for spreading awareness and making some initiatives. Our country is full of talented engineers who can be very helpful in designing the banks into great tourist spots. separate, clean & neat arrangements have to be made for performing rituals along river ganga. along with tourism dept and other engineering construction companies positive initiative can be taken to develop river banks of haridwar, kanpur, alahbad & patna. this project should be complete in 2 years if parallel initiatives are taken in all the above mentioned cities.

  • "All the superior religions had their growth between the Ganga and the Euphrates"-Vivekananda

  • ""The land where the Ganges does not flow is likened in one hymn to the sky without the sun, a home without a lamp, a brahmin without a Vedas" ."- As stated in "Travel in India" by Jean Tavernier -

  • " "The Ganga to me is the symbol of India's memorable past which has been flowing into the present and continues to flow towards the ocean of the future."" - Jawaharlal Nehru, First Prime Minister of India -